सन्यासी जीवन और युवा मन का मिश्रण है - सन्यासी की तरह सोचें




युवा कहानीकार, पॉडकास्टर और सन्यासी रह चुके लेखक जय शेट्टी की हालिया रिलीज़ पुस्तक Think Like a Monk कुछ ही दिनों में पाठकों का ध्यानाकर्षण करने में कामयाब रही है। हॉर्पर कॉलिन्स प्रकाशन से आई यह पुस्तक बेस्ट सेलर पुस्तकों में शुमार हो गई है। अपने ज्ञान, अनुभवों को सरलता से, प्रासंगिक और व्यवहारिक तरीके से लेखक पाठकों तक इस पुस्तक के जरिये से पहुंचाने में कामयाब हुए हैं। इस प्रेरक पुस्तक में लेखक वैदिक परंपरा में सन्यासी के रूप में अर्जित ज्ञान को पाठकों तक पहुंचाने का सफल प्रयास करते नज़र आ रहे हैं।


लेखक बड़े ही सहज भाव से सरल शब्दों में यह बतलाने में कामयाब होते हैं कि हम अपनी क्षमता और शक्ति की राह में आने वाले अवरोधों को कैसे हटा सकते हैं। प्राचीन बुद्धिमता और आश्रम के समृद्ध अनुभवों को मिश्रित करने वाली यह पुस्तक साफ तौर पर बतलाने में सक्षम है कि हम नकारात्मक विचारों और आदतों से कैसे उबर सकते हैं। उस शांति और उसके उद्देश्य तक कैसे पहुंच सकते हैं, जो हम सभी के भीतर मौजूद है।

Think Like a Monk पुस्तक हमें चिंतन और मंथन में सक्षम बनाती है। पुस्तक में लोगों के भीतर की ऊर्जा को जाग्रत करने, ऊर्जा का सैलाब भरने, सफलता को परिभाषित करने और अपने लक्ष्यों के प्रति गहनता से जुड़ने, समर्पित होने को प्रेरित करती है।

पुस्तक मुख्य तौर पर 3 हिस्सों में विभाजित करके लिखी गई है। पहले हिस्से (Let Go) के 4 भागों में पहचान, नकारात्मकता, डर और भावों पर बात की गई है। इनकी समस्या और उपायों पर लेखक ने खुलकर अपने विचार सरलता से रखे हैं। पुस्तक के दूसरे हिस्से (Grow) में उद्देश्य, दिनचर्या, दिमाग और अहं पर फोकस किया गया है। तीसरा और आखरी खंड (Give) मुख्यतौर पर तीन पक्षों को मजबूती से रखने में कामयाब हुआ है। इनमें कृतज्ञता, संबंध और सेवा शामिल हैं। इन सभी 11 अध्यायों के जरिये लेखक ने जीवन को असल रूप में जीवंत बनाने की जागृति का प्रयास किया है। अपनी पुस्तक की शुरुआत ही लेखक जिस पंक्ति से करते हैं, अद्भुत है -

If you want a new idea, read an old book.
- Ivan Pavlov 

अपनी 18 की उम्र से शब्दों को कहानी में गूंथने से शुरू होकर जीवन के यथार्थ से जोड़ने वाली यह पुस्तक लेखक के युवा मन में मानसिक, आध्यात्मिक, सांसारिक, पारिवारिक और वैचारिक भावों को प्रदर्शित करती है। हाँ, इस बात में कोई दो राय नहीं कि विशुद्ध और प्रभावी लेखन पाठकों को खास पसंद आ रहा है, जो बतलाता है कि लेखक अपने भावों को कहने में कामयाब हुए हैं। पुस्तक की कामयाबी के बाद अब प्रकाशक मंजुल प्रकाशन ने इसे हिंदी और मराठी भाषा मे भी प्रकाशित किया है। पुस्तक के तेलुगु, मलयालम और गुजराती संस्करण भी जल्द जारी होने हैं।
समीक्षक : डॉ. पुष्पा कुमारी
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English Edition - Think Like a Monk
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